राजस्थान में विधानसभा की पांच सीटों पर उपचुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। सांसद बने पांचों विधायकों ने अपने इस्तीफे दे दिए हैं। इनकी सीटें अब रिक्त हो गई है। अब कभी भी इन विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव की तिथि घोषित हो सकती है। इस उपचुनाव में भाजपा यदि एक भी सीट जीतती है तो उसे फायदा होगा। कारण, भाजपा का फिलहाल किसी भी सीट पर कब्जा नहीं है। ऐसे में भाजपा सभी सीटों पर यदि हार भी जाती है तो उसको कोई नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। पांच विधाययक इस बार लोकसभा का चुनाव लड़ सांसद बने हैं। इनमें से तीन कांग्रेस के और एक आरएलपी व एक बीएपी से था। इनके सांसद बनने से इनकी सीटें रिक्त हो गई है। अब यहां उपचुनाव होना है। यूं तो इन सभी पांचों सीटों पर भाजपा का कब्जा नहीं है। लेकिन उपचुनाव में भाजपा जीतने के साथ-साथ अपने वोट शेयर को बढ़ाने का पूरा प्रयास करेगी। हालांकि इस समय में राजस्थान में भाजपा की सरकार है। ऐसे में सरकार में मतदाताओं को लुभाने का पूरा प्रयास भी करेगी। विधानसभा चुनाव में भाजपा का वोट शेयर 41.69 फीसदी तो कांग्रेस का वोट शेयर 39.53 फीसदी रहा है। कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में क्षेत्रीय दलों की पार्टियों से गठबंधन किया था। इसका कांग्रेस को फायदा भी मिला। कांग्रेस ने लोकसभा की 25 में से तीन सीटों पर कब्जा भी किया था। इनमें से दो विधायक जीते हैं। रालोपा से खींवसर विधायक हनुमान बेनीवाल और डूंगरपुर जिले के चौरासी विधानसभा सीट से बीएपी से राजकुमार रोत जीते हैं। इधर अब रालोपा के बेनीवाल ने स्पष्ट कर दिया है कि वे खींवसर सीट से अकेले ही चुनाव लडेंगे। वे कांग्रेस से कोई गठबंधन नहीं करेंगे। बीएपी ने गठबंधन को लेकर अभी कोई खुलासा नहीं किया है। लेकिन क्षेत्र में बीएपी मजबूत मानी जा रही है। ऐसे में बीएपी के कांग्रेस के गठबंधन की भी संभावना कम ही नजर आती है।
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