छात्र आंदोलन के समय मारपीट करने के मामले में लाडनूं विधायक मुकेश भाकर को शहर की अधीनस्थ अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। 15 साल पुराने इस मामले के साथ ही एक अन्य मामले में भी महानगर प्रथम क्षेत्र की अतिरिक्त मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट-2 ने भाकर सहित अन्य आरोपियों को राहत दी। भाकर व उनके साथियों के खिलाफ 9 सितंबर, 2007 को जयपुर के गांधीनगर थाने में एफआइआर दर्ज हुई। इसमें उद्यम सिंह ने बताया कि कृष्णा छात्रावास में मैस बंद होने के कारण परिवादी और उसके साथी बाहर से खाना खाकर राजस्थान विश्वविद्यालय लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में मुकेश भाकर व उनके साथी छात्रों ने उनसे मारपीट की। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से 23 जुलाई,2010 को गांधीनगर थाने में दर्ज कराए एक मामले में मुकेश भाकर सहित अन्य छात्र नेताओं पर टायर जलाकर विवि का रास्ता अवरुद्ध करने का आरोप लगाया था। एफआइआर में यह भी कहा था कि भाकर व अन्य छात्र नेताओं ने उस समय कुलपति सचिवालय के गेट बंद कर लोगों को अंदर जाने से रोक दिया। दोनों ही मामलों में अभियोजन पक्ष के आरोप साबित नहीं कर पाने और घटना के प्रत्यक्षदर्शियों के पक्षद्रोही होने के कारण अदालत ने आरोपियों को बरी कर दिया।
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