लोकसभा चुनाव की घोषणा होने से पहले और आखिरी चरण की वोटिंग तक राम मंदिर की काफी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ समेत बीजेपी के तमाम बड़े नेता राम मंदिर का जिक्र कर रहे थे। बीजेपी को राम मंदिर के उद्धाटन से न केवल यूपी बल्कि देश के कई हिस्सों में बढ़त मिलने की उम्मीद थी। मंगलवार लोकसभा चुनाव नतीजों के ठीक पहले 400 पार की बात हो रही थी लेकिन नतीजों के दिन मंगलवार एनडीए और इंडिया के बीच कांटे का मुकाबला दिख रहा है। रुझानों में एनडीए को भले ही बहुमत मिलता दिख रहा है लेकिन अकेले बीजेपी बहुमत से दूर जाती दिख रही है। अकेले बीजेपी बहुमत से जो दूर नजर आ रही है उसके पीछे एक बड़ा कारण सबसे बड़े राज्य यूपी में उसका प्रदर्शन। यहां बीजेपी ने सभी सीटों को जीतने का टारगेट रखा था और उसे उम्मीद थी कि इस बार राम मंदिर के सहारे वह ऐसा कर पाएगी। लेकिन जैसे-जैसे वोटों की गिनती आगे बढ़ रही है उससे लगता है कि ऐसा हो नहीं पाया। 22 जनवरी राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दिन सबसे बड़ा मुद्दा बना था विपक्ष के नेताओं का उस कार्यक्रम में न जाना। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत विपक्ष के बड़े नेताओं ने जब इस कार्यक्रम से दूरी बनाई तो इसको लेकर बीजेपी की ओर से उन पर काफी हमला बोला गया। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में चुनावी सभा के दौरान नरेंद्र मोदी ने चुनावी मंच से सपा, कांग्रेस और इंडिया गठबंधन पर जमकर निशाना साधा था। मोदी ने मंच से संबोधन में कहा था कि सपा-कांग्रेस वाले सरकार में आए तो राम मंदिर पर बुलडोजर चलवा देंगे। सपा कांग्रेस वाले अगर सरकार में आए तो रामलला को फिर से टेंट में भेज देंगे और राम मंदिर पर बुलडोजर चलवा देंगे। वहीं यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ न केवल यूपी बल्कि देश के दूसरे हिस्सों में जहां भी प्रचार करने गए वहां उन्होंने यही कहा कि जो राम को लाए हैं, जनता उनको लाएगी। फिलहाल जो नतीजे सामने आ रहे हैं उसमें बीजेपी के लिए वैसी बात नहीं दिख रही है। इसमें कोई दो राय नहीं कि 22 जनवरी राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के दिन देश में एक अलग ही माहौल नजर आ रहा था। सिर्फ अयोध्या, यूपी ही नहीं पूरे देश में जश्न का माहौल था। दिन बड़ा भी था क्योंकि राम मंदिर का सपना पूरा हो रहा था। उस दिन जो लहर नजर आ रही थी उसके बाद बीजेपी की ओर से यूपी समेत पूरे देश में जबर्दस्त लहर बनाने की कोशिश की गई। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद दो महीने तक बारी-बारी से बीजेपी की राज्य सरकारों के मंत्रिमंडल के साथ-साथ तमाम वीआईपी लोगों का अयोध्या जाने का सिलसिला जारी रहा। पूरी कवायद इस बात की थी कि राज्य में चुनाव तक राम मंदिर का मुद्दा एक मिनट के लिए भी ठंडा न पड़ने पाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय तक प्रदेश में डेरा डाले रहे। अयोध्या में रोड शो भी किया लेकिन इसका असर होता नहीं दिख रहा है।
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