हस्तशिल्प कार्य में डिजाइनों का बहुत बड़ा योगदान है एवं बाजार की मांग के अनुसार अगर डिजाइनों को तैयार कर हस्तशिल्प के प्रोडक्ट को बनाकर बाजार में बेचा जाए तो बहुत बड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है यह बात कृषि विज्ञान केंद्र बाड़मेर एवं बीएलएमसीएल के सहयोग से संचालित हस्तशिल्प विकास परियोजना के तहत आयोजित 15 दिवसीय डिजाइन विकास कार्यशाला के समापन पर बीएलएमसीएल के एवीपी ऑपरेशन अमित दुबे ने अपने संबोधन में मंगलवार कोई नागनेची ढूंढा मे कहीं l उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं को रोजगार से जोड़कर ही हम देश को विकास की धारा में आगे बढ़ा सकते हैं l 
इस अवसर पर बीएलएमसीएल के इकोलॉजिस्ट आलोक द्विवेदी ने कहा की परियोजना के तहत महिलाओं द्वारा जो  स्वरोजगार के कार्य से जुड़ने का जो अवसर मिला है उसका अधिक से अधिक लाभ उठाये l कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ विनय कुमार ने कहा कि कृषि कार्यों के साथ-साथ हस्तशिल्प के काम को जोड़कर महिलाओं को अपने हुनर को आगे बढ़ने का अवसर दिया गया है एवं महिलाओं को रोजगार से जोड़ा गया है l प्रोजेक्ट एसोसिएट कानाराम प्रजापत ने बताया की परियोजना के तहत आठ गांव की 350 महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जोड़ा गया है एवं 28 स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैंl समूह से जुड़ी सभी महिलाओं को 30 दिवसीय स्किल प्रशिक्षण एवं 15 दिवसीय डिजाइन विकास कार्यशालाओं के माध्यम से हाथ के हुनर को आगे बढ़ाने का काम पिछले 3 साल से निरंतर किया जा रहा हैl 15 दिवसीय डिजाइन कार्यशाला के दौरान डिजाइनर धारिणी दीक्षित एवं कार्यशाला सहायक चुन्नी परिहार ने महिलाओं को बाजार की मांग के अनुसार उत्पाद तैयार करने के गुर सिखाए l कार्यक्रम के समापन पर कृषि विज्ञान केंद्र की गृह विज्ञान विशेषज्ञ डॉ रश्मि दुर्ग पाल ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया एवं महिलाओं से सीखे हुए ज्ञान को अपने व्यवहारिक जीवन में लागू करने का आह्वान किया l परियोजना से अब्दुल अज़ीज़,  गोमती, अंकिता पांडे ने सहयोग किया l कन्नू देवी, मूमल देवी,  कमला देवी, मीना देवी, लेहरी देवी निम्बू देवी, मंजू देवी आदि ने अपने-अपने अनुभव साँझा किये l